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आवारा पशुओं से बढ़ती दुर्घटनाएं, चार पशुओं की मौत से हड़कंप

Shantanu Roy
7 Sept 2025 10:12 PM IST
आवारा पशुओं से बढ़ती दुर्घटनाएं, चार पशुओं की मौत से हड़कंप
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जनता में आक्रोश
Azamgarh. आजमगढ़। आजमगढ़-जौनपुर मुख्य मार्ग पर आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। बीती रात रानीपुर रजमो गांव के पास एक दर्दनाक घटना सामने आई, जब एक वाहन की चपेट में आने से चार पशुओं की मौत हो गई। घटना के बाद शव सड़क पर पड़े रहे, जिससे अन्य वाहन चालकों को भी खतरा पैदा हो गया। स्थानीय लोगों ने घटना की सूचना उच्च अधिकारियों को दी, जिसके बाद कुछ लोग मौके पर पहुंचे और शवों को हटाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर आवारा पशुओं का
घूमना
रोजमर्रा की समस्या बन चुका है। दिन हो या रात, कहीं भी पशु दिखाई दे जाते हैं। सड़क किनारे और डिवाइडर के बीच उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियां वाहन चालकों की दृष्टि बाधित करती हैं, जिससे अचानक सामने आए पशुओं से टकराने का खतरा बढ़ जाता है। कई जगहों पर अंधे मोड़ भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा समस्या की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा, जबकि इस पर तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।

ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने पशुओं की सुरक्षा के लिए रानीपुर रजमो गांव में एक पशु आश्रय स्थल तो बनाया है, लेकिन वहां व्यवस्थाएं पूरी तरह लचर हैं। आश्रय स्थल में न पर्याप्त जगह है, न ही पर्याप्त देखरेख की व्यवस्था। नतीजतन, पशु सड़कों पर भटकते रहते हैं। बड़े वाहनों से टकराकर पशुओं की मौत तो हो रही है ही, साथ ही छोटे वाहनों के चालकों और यात्रियों के लिए भी ये हादसे जानलेवा बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि आश्रय स्थल में लापरवाही बरती जा रही है। वहां न तो पर्याप्त चारा उपलब्ध है, न समय पर देखभाल की जाती है। पशु सुरक्षा के नाम पर जो राशि खर्च की जा रही है, वह अधिकारियों की उदासीनता के कारण व्यर्थ साबित हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रय स्थल की व्यवस्थाएं दुरुस्त न होने के चलते पशु सड़कों पर आ रहे हैं और जानलेवा दुर्घटनाएं घट रही हैं। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि आजमगढ़-वाराणसी और आजमगढ़-जौनपुर मार्गों के बीच स्थित रानीपुर रजमो गांव में समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर मुद्दे की ओर नहीं जा रहा। न तो नियमित निरीक्षण हो रहा है, न ही पशुओं की सुरक्षा के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर घूम रहे आवारा पशुओं को रोकने के लिए तुरंत प्रभाव से कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि झाड़ियों की सफाई की जाए ताकि वाहन चालकों को दूर से ही पशु दिखाई दें और दुर्घटनाएं रोकी जा सकें।

इसके अलावा, आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए। ग्रामीणों ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा पशु सुरक्षा के लिए जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, उन्हें सही दिशा में लागू किया जाए। आश्रय स्थलों में चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही नियमित निरीक्षण कर लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल स्थिति को नियंत्रित करने का आश्वासन दिया है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही झाड़ियों की सफाई और आवारा पशुओं की पहचान कर उन्हें आश्रय स्थल में भेजने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही, सड़क पर घूमते पशुओं से बचाव के लिए यातायात पुलिस को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि
प्रशासन
जल्द कार्रवाई नहीं करता तो भविष्य में दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल आजमगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र में फैलती जा रही है। उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस मुद्दे पर प्राथमिकता से काम किया जाए ताकि पशुओं और वाहन चालकों दोनों की जान बचाई जा सके। इस घटना ने सड़क सुरक्षा और पशु संरक्षण के प्रति प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लेकर ठोस कार्रवाई की जाए, ताकि सड़क पर पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह जर्जर आश्रय स्थलों को दुरुस्त कर पशुओं की देखरेख सुनिश्चित करे।
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